चारोळी चकोर
शनिवार, २५ जुलै, २०२०
दर्द की भाषा..
दर्द की भाषा..
दर्द की अपनी भाषा होती है
इसे महसूस करना पड़ता है।
सबको समझ ये आती नही
इस से रिश्ता जोड़ना पड़ता है।
--सुनील पवार..
305
People Reached
15
Engagements
Boost Post
10
10
1 Share
Like
Comment
Share
कोणत्याही टिप्पण्या नाहीत:
टिप्पणी पोस्ट करा
नवीनतम पोस्ट
थोडे जुने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
याची सदस्यत्व घ्या:
टिप्पणी पोस्ट करा (Atom)
कोणत्याही टिप्पण्या नाहीत:
टिप्पणी पोस्ट करा