ऐतबार...
चार शब्दों का ऐतबार
चार दिनों में ख़त्म होता है..
आज का मरहम भरा शब्द भी
कल जख्म सा लगता है..!!
***सुनिल पवार...✍️
चार दिनों में ख़त्म होता है..
आज का मरहम भरा शब्द भी
कल जख्म सा लगता है..!!
***सुनिल पवार...✍️
फुलों की तरह..
फुलों की तरह
तुम कभी ना मुर्झांना..
इत्तर में घोर कर
बदन से लिपते रहना..!!
--सुनील पवार..