शनिवार, १९ सप्टेंबर, २०२०

लिख कर देखो..

 लिख कर देखो..

लिख कर देखो
कभी अपने दिल की वह बात।
हमारी छोड़ो
कभी खुद से कर लो मुलाकात।
--सुनिल पवार..✍️

मंगळवार, १ सप्टेंबर, २०२०

गंध अक्षरांचा

 गंध अक्षरांचा..

गंध अक्षरांचा कळेल जेव्हा
अर्थ शब्दांना मिळतील तेव्हा।
भावनांचे मोहोळ उठतील जेव्हा
डंख कवितेचे छळतील तेव्हा।
--सुनील पवार..✍️

चाहते तो सब हैं

 चाहते तो सब हैं..

चाहते तो सब हैं
पर चाहने से क्या होगा।
असर वही करेगा
जो दिल से निकलेगा।
सुनील पवार..✍️

कोण मनात माझ्या..

 कोण मनात माझ्या..

कोण मनात माझ्या
काय सांगू कोणाला।
एक कवडसा डोकावतो
मनात क्षणाक्षणाला।
--सुनील पवार..✍️

ख़र्च कर दिया ख़ुद को..

 ख़र्च कर दिया ख़ुद को..

ख़र्च कर दिया ख़ुद को फिर भी
कुछ हाँसिल हुआ ना ज़िंदगी में।
शायद बाज़ार की लतख़ोरी
अब दाख़िल हुई है रिश्तों में।
--सुनील पवार..✍️

शाम का इशारा हैं..

 शाम का इशारा हैं..

शाम का इशारा है
और चाय का सहारा है।
इक तेरी कमी है
बाकी रंगीन नज़ारा है।
--सुनील पवार..✍️

जीवन का अफ़सना लिख..

 जीवन का अफ़सना लिख..

जीवन का अफ़साना लिख
ज़िंदगी के गीत तू लिख।
संगीत में सँजोग दे उन्हें भी
जो ज़माने से मिले सिख।
--सुनील पवार..✍️
🌺Good🌞Morning🌺