गुरुवार, २३ मे, २०१९

कर जरा...

कर जरा...
माझं काहीच म्हणणं नाही
असेल जर तुला मौन प्यारे..
मी शब्दरूप देईन त्याला
तू कर जरा नजरेने इशारे..!!
--सुनिल पवार...✍️

गलती...

गलती...
मेरे लब्जों का कोई क़सूर नही..
गलती तो तेरे समझ की है।
--सुनिल पवार...✍️

माँ

माँ
जब तुमने मुझे छुआ था
तब एहसास यह हुआ..
के दुनिया मे गर रब होगा
तो तुम्हारे रूप में होगा।
--सुनिल पवार...✍️

चाँद मेरे...

रात का अफ़साना...
चाँद मेरे करीब आ
जरा बादलों का घूंघट हटा।
इन हवाओं की मस्ती में
जरा लहराने दो काली घटा।
शब्बा ख़ैर....🌜
--सुनिल पवार....✍️

अभी भी वक़्त है...

अभी भी वक़्त है...
अभी भी वक्त है संभल जावो..
एक बार जो गिर, गए तो उठ नही पाओगे।
--सुनिल पवार...✍️

मगर सोच रहा हूँ

सब अच्छा हो जाएगा...
तसल्ली देता हूँ दिल को
सब अच्छा हो जाएगा।
मगर सोच रहा हूँ फिर भी
वह दिन कब आएगा।
--सुनिल पवार...✍️

न जाणे कधी..

न जाणे कधी..
ते दिवस न जाणे पुन्हा कधी येणार
विरहाची रात्र न जाणे कधी सरणार..
आठवण तुला आली असे कधी होणार
तलम मोरपीस न जाणे कधी फिरणार..!!
***सुनिल पवार...✍️