गुरुवार, १५ ऑक्टोबर, २०२०

सच का दामन थाम के रखो

 सच का दामन थाम के रखो..

सच का दामन थाम के रखो
उम्मीद का हाथ कभी ना छोड़ो।
आएंगी मुश्किले राह में मगर
मंज़िल से नाता कभी ना तोड़ो।
--सुनील पवार..

शनिवार, ३ ऑक्टोबर, २०२०

तुम्हारा ख़याल जैसे

 तुम्हारा ख़याल जैसे..

तुम्हारा ख़याल जैसे
तारों की झिलमिल।
रात के आँगन में सजी
यादों की महफ़िल।
--सुनील पवार..✍️

सुनता कहाँ है वो

 सुनता कहाँ है वो..

सुनता कहाँ है वो
वो तो कहती रहती है।
यहीं बात मगर
उसको खटकती रहती है।
--सुनील पवार..✍️

आप कहें तो

आप कहें तो..

आप कहें तो
दिया जला दु दिलमें।
या छोड़ दु
अपने हाल पे जलने।
--सुनील पवार..

ज़िंदगी की किताब

 ज़िंदगी की किताब..

ज़िंदगी की किताब
पढ़ना जरूरी है।
उसके बिना मानो
ज़िंदगी अधूरी है।
--सुनील पवार..✍️

क्षणभर आठवणी

क्षणभर आठवणी..

क्षणभर आठवणी
मणभर वेदना देतात।
रिक्त झाल्या पोकळीची
जाणीव करून देतात।
--सुनील पवार..✍️

हर जवाब मिलता है

हर जवाब मिलता है..

हर जवाब मिलता है
सवाल पूछते रहना चाहिए।
कभी दूसरों से
तो कभी
अपने आप से मिलना चाहिए।
--सुनील पवार..✍️