रविवार, १४ जुलै, २०१९
आज तरी संपू दे...
तुम मिले भी तो...
तुम मिले भी तो...
तुम मिले भी तो अज़नबी सी लगती हो
वो प्यार वो अपनापन कहीं खो गया है।
--सुनिल पवार...✍️
वो प्यार वो अपनापन कहीं खो गया है।
--सुनिल पवार...✍️
तुम भी तो कर सकते हो...
तुम भी तो कर सकते हो..
तुम भी तो कर सकते हो
आसमाँ को छू सकते हो।
आसमाँ को छू सकते हो।
हौसलों की सीढ़ी बुलंद कर
मनचाहे रंग भर सकते हो।
--सुनिल पवार...✍️
मनचाहे रंग भर सकते हो।
--सुनिल पवार...✍️
दिल नहीं लग रहा...
दिल नहीं लग रहा...
तेरे बिन दिल नहीं लग रहा
यह सोचना फिजूल हैं।
जहाँ कद्र नहीं वहाँ फ़िक्र नही
यह अपना उसूल है।
--सुनिल पवार...✍️
यह सोचना फिजूल हैं।
जहाँ कद्र नहीं वहाँ फ़िक्र नही
यह अपना उसूल है।
--सुनिल पवार...✍️
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हिंदीi चारोळी,
हिन्दी शायरी
ख़त हैं लेकिन पता नहीं..
ख़त हैं लेकिन पता नहीं..
क़लम तो उठा ली है मगर
अब कागज़ मुस्कुराता नहीं।
यह कैसी अजीब उलझन है
ख़त तो हैं, लेकिन पता नहीं।
--सुनिल पवार...✍️
अब कागज़ मुस्कुराता नहीं।
यह कैसी अजीब उलझन है
ख़त तो हैं, लेकिन पता नहीं।
--सुनिल पवार...✍️
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हिन्दी शायरी
कभी ख़ुद से भी मिलते रहिये..
दूसरों से पहचान होती रहेगी
कभी ख़ुद से भी मिलते रहिये।
वह नही जो आईनें में दिखता है
अपने अंदर झाँक के देखिए।
--सुनिल पवार...✍️
कभी ख़ुद से भी मिलते रहिये।
वह नही जो आईनें में दिखता है
अपने अंदर झाँक के देखिए।
--सुनिल पवार...✍️
पहिला पाऊस...
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